सावन शिवरात्रि व्रत कथा 2024: संकटों से मुक्ति दिलाने वाली पवित्र कथा

सावन शिवरात्रि 2024: भक्तों को इस व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए, जिससे सभी संकट दूर होंगे।

सावन शिवरात्रि व्रत कथा
सावन शिवरात्रि व्रत कथा

सावन शिवरात्रि का महत्व

हिंदू धर्म में सावन शिवरात्रि का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान शिव की पूजा और व्रत रखने से सभी कष्टों का निवारण होता है। 2 अगस्त को मनाई जाने वाली इस शुभ तिथि पर भक्तगण पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव की अराधना करते हैं। व्रत रखने वाले भक्तों को इस दिन व्रत कथा सुननी चाहिए, जिससे उन्हें व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त हो सके।

सावन शिवरात्रि का परिचय

सावन शिवरात्रि हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर साल सावन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। यह तिथि भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन की पावन तिथि मानी जाती है। सावन माह में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, क्योंकि यह महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। महाशिवरात्रि के बाद सावन शिवरात्रि को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

सावन शिवरात्रि व्रत कथा

सावन शिवरात्रि व्रत कथा के अनुसार, वाराणसी के घने जंगल में गुरुद्रुह नाम का एक भील शिकारी अपने परिवार के साथ रहता था। एक दिन शिकार की तलाश में निकला गुरुद्रुह बहुत समय तक कुछ नहीं पा सका। थकान और भूख के कारण वह एक बेल के पेड़ पर चढ़ गया, जिसके नीचे एक शिवलिंग स्थापित था।

शिकार की तलाश में, गुरुद्रुह ने एक हिरनी को देखा और तीर धनुष तान लिया। लेकिन उसके तीर चलाने से पहले, पेड़ से बेलपत्र और पास रखा जल शिवलिंग पर गिर गया। इस प्रकार, उसने अनजाने में ही शिवरात्रि के पहले पहर की पूजा कर ली।

हिरनी ने शिकारी से विनती की कि उसे अपने बच्चों के पास लौटने दिया जाए, और वह वापस आने का वादा करती है। गुरुद्रुह ने उसे जाने दिया। इसी प्रकार, दूसरे पहर में हिरनी की बहन और तीसरे पहर में हिरण भी आए, और गुरुद्रुह ने फिर से अनजाने में पूजा कर ली।

चौथे पहर की कथा

तीसरे पहर के बाद, तीनों हिरन-हिरनी अपने वादे के मुताबिक वापस लौट आए। भूख से तड़पते हुए गुरुद्रुह ने पेड़ से बेलपत्र तोड़ते हुए शिवलिंग पर डाल दिया, जिससे चौथे पहर की भी पूजा हो गई। इस प्रकार, चारों पहरों में अनजाने में भगवान शिव की पूजा करने से गुरुद्रुह के सभी पाप धुल गए।

भगवान शिव का आशीर्वाद

भगवान शिव ने प्रसन्न होकर गुरुद्रुह को दर्शन दिए और आशीर्वाद दिया कि त्रेतायुग में भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम उसके घर पधारेंगे और उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी। इस प्रकार, अनजाने में किए गए शिवरात्रि व्रत से भगवान शंकर ने शिकारी को मोक्ष प्रदान कर दिया।

व्रत कथा का महत्व

सावन शिवरात्रि व्रत कथा सुनने और पढ़ने से भक्तों को शिवरात्रि व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस कथा का पाठ करने से भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है और सभी प्रकार के संकट दूर हो जाते हैं।

निष्कर्ष

सावन शिवरात्रि का व्रत और कथा हिंदू धर्म में विशेष स्थान रखती है। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा से भक्तों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस पावन अवसर पर भक्तों को व्रत कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए, जिससे उनके जीवन के सभी संकट दूर हो सकें और उन्हें भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त हो।

डिस्क्लेमर

अस्वीकरण: यह लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल जानकारी और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए यह वेबसाइट उत्तरदायी नहीं है।


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